मंजिल से आगे बढ़ कर मंजिल तलाश कर
मिल जाये तुझको दरिया तो समन्दर तलाश कर ।
हर शीशा टूट जाता है पत्थर की चोट से
पत्थर ही टूट जाये वो शीशा तलाश कर ।
सजदों से तेरे क्या हुआ सदियाँ गुजर गयीं
दुनिया तेरी बदल दे वो सजदा तलाश कर ।
ईमान तेरा टूट गया रहबर के हाथों से
ईमान तेरा बचा ले वो रहबर तलाश कर ।
हर शख्स जल रहा है अदावत की आग में
इस आग को बुझा दे वो पानी तलाश कर ।
करे सवार ऊंट पे अपने गुलाम को
पैदल ही खुद चले जो वो आक़ा तलाश कर ।।


Allama Iqbal ke Naseehat Aamoz Ashaar