कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी

कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी

बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने,

आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी

Kabhi gum to kabhi tanhai mar gyi || Bewafa shayari on this page

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