सरहद तुम्हें पुकारे तुम्हें आना ही होगा,

कर्ज अपनी मिट्टी का चुकाना ही होगा,

दे करके कुर्बानी अपने जिस्मो-जां की,

तुम्हे मिटना भी होगा मिटाना भी होगा।