Gauraiya kavita | Poem in hindi

कितने अधिकार से
फुदकती है गौरैया!
घर में
आंगन में
छज्जे-मुंडेर पर

मेरा घर
अपना घर समझती है
गौरैया!

चहचहाती है गौरैया!
खिड़की से
झांकती है गौरैया!

घोंसलें बनाती है
गौरैया!
दाना चूगती हैं
चुगाती है
गौरैया!

दानें बिखेरता हूं
चुन-चुन कर खाती है
और
उड़-उड़ जाती है
गौरैया!
पास नहीं आती है
गौरैया!

~ गौरैया