बिन उस की ज़िंदगी दर्द-ए-तन्हाई है,
 
मेरी आँखों में क्यू मौत सिमट आई है, 
 
कहते हैं लोग इश्क़ को इबादत यारो,
 
 इबादत में फिर क्यू इतनी रुसवाई है
 
 
 
 
bin us dard ki jindagi
 
 
 
 
 
 

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