बिन देखे मैं तुझसे प्यार कर बेठा,
बस यही गुनाह मैं एक बार कर बेठा
मिलना तो तुझसे मुकदर को मंजूर न था
ये सब जानते हुए मैं मोहब्बत तुझसे बेसुमार कर बेठा
अगर मंजूर हुआ मुकदर को तो फूल फिर खिलेंगे
बिछड़े हुए दो दिल फिर मिलेंगे
अगर मिल न पाये इस जनम में तो काया हुआ
ये आशिक़ है फिर मिलेंगे किसी और जानम में !




आँखों में दोस्तो जो पानी है
हुस्न वालों की ये मेहरबानी है |
आप क्यों सर झुकाए बैठे हैं
क्या आपकी भी यही कहानी है ||




ज़िक्र भी करदूं ‘मोदी’ का तो खाता हूँ गालियां
अब आप ही बता दो मैं
इस जलती कलम से क्या लिखूं ??

कोयले की खान लिखूं
या मनमोहन बेईमान लिखूं ?

पप्पू पर जोक लिखूं
या मुल्ला मुलायम लिखूं ?

सी.बी.आई. बदनाम लिखूं
या जस्टिस गांगुली महान लिखूं ?

शीला की विदाई लिखूं
या लालू की रिहाई लिखूं

‘आप’ की रामलीला लिखूं
या कांग्रेस का प्यार लिखूं

भ्रष्टतम् सरकार लिखूँ
या प्रशासन बेकार लिखू ?

महँगाई की मार लिखूं
या गरीबो का बुरा हाल लिखू ?

भूखा इन्सान लिखूं
या बिकता ईमान लिखूं ?

आत्महत्या करता किसान लिखूँ
या शीश कटे जवान लिखूं ?

विधवा का विलाप लिखूँ ,
या अबला का चीत्कार लिखू ?

दिग्गी का’टंच माल’लिखूं
या करप्शन विकराल लिखूँ ?

अजन्मी बिटिया मारी जाती लिखू,
या सयानी बिटिया ताड़ी जाती लिखू?

दहेज हत्या, शोषण, बलात्कार लिखू
या टूटे हुए मंदिरों का हाल लिखूँ ?

गद्दारों के हाथों में तलवार लिखूं
या हो रहा भारत निर्माण लिखूँ ?

जाति और सूबों में बंटा देश लिखूं
या बीस दलो की लंगड़ी सरकार लिखूँ ?

नेताओं का महंगा आहार लिखूं
या 5 रुपये का थाल लिखूं ?

लोकतंत्र का बंटाधार लिखूं
या पी.एम्. की कुर्सी पे मोदी का नाम लिखूं ?

अब आप ही बता दो मैं
इस जलती कलम से क्या लिखूं”




जाने कभी गुलाब लगती हे
जाने कभी शबाब लगती हे
तेरी आखें ही हमें बहारों का ख्बाब लगती हे
में पिए रहु या न पिए रहु,
लड़खड़ाकर ही चलता हु
क्योकि तेरी गली कि हवा ही मुझे शराब लगती हे



बादल चाँद को छुपा सकता है आकाश को नही…….
हम सबको भुला सकते है आप को नही…



जब खामोश आँखो से बात होती है
ऐसे ही मोहब्बत की शुरुआत होती है
तुम्हारे ही ख़यालो में खोए रहते हैं
पता नही कब दिन और कब रात होती है……..




मंज़िलो से अपनी डर ना जाना,
रास्ते की परेशानियों से टूट ना जाना,

जब भी ज़रूरत हो ज़िंदगी मे किसी अपने की,
हम आपके अपने है ये भूल ना जाना.





हस्ते रहें आप हजारों के बीच में,
जैसे हस्ते हैं फूल बहारों के बीच में,
रोशन हो आप दुनिया में इस तरह,
जैसे होता है चाँद सितारों के बीच में |





दोस्त दोस्त से खफा नहीं होता,
प्यार प्यार से जुदा नहीं होता,
भुला देना मेरी कुछ कमियों को,
क्यूंकि इंसान कभी खुदा नहीं होता |




तेरी दोस्ती ने बहुत कुछ सीखा दिया,
मेरी खामोश दुनिया को जैसे हँसा दिया,
कर्ज़दार हूँ मैं खुदा का,
जिस ने मुझे आप जैसे दोस्त से मिला दिया |



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