Gauraiya kavita | Poem in hindi

कितने अधिकार सेफुदकती है गौरैया!घर मेंआंगन मेंछज्जे-मुंडेर पर मेरा घरअपना घर समझती हैगौरैया! चहचहाती है गौरैया!खिड़की सेझांकती है गौरैया! घोंसलें बनाती हैगौरैया!दाना चूगती हैंचुगाती हैगौरैया!…

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