बताओ किस जगह सुखाऊँ तुम्हारी यादें…. Sad Poetry || Gulzar Shayari ||Ishq-E-Syahi



बताओ किस जगह सुखाऊँ तुम्हारी यादें बरसात बाहर भी है और अंदर भी है.. और ज़ख्म वही है जो छुपा लिया जाए जो दिखा दिया …

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